RELIGIOUS

भगवान में अनंत गुण होते हैं मुनि श्री समता सागर जी महाराज

भगवान में अनंत गुण होते हैं भक्त भगवान की इसी उद्देश्य से भक्ति आराधना करता है की भगवान के गुण उसमें भी समाहित होते जाएं भगवान का गुण अनुवाद इसीलिए किया जाता है ताकि पंच परमेष्ठी हमारे निकट वास करें उनका मंगल सानिध्य हमें निरंतर मिलता रहे क्योंकि इस कलीकाल पंचम काल में आत्म कल्याण के लिए यही मार्ग है

मुनि श्री ने अपने मंगल प्रवचन ओं में आगे कहा कि चंदनबाला की मुनि भक्ति सर्वोत्कृष्ट है उसने विपरीत परिस्थितियों में भी पडगाहन करके भगवान को आहार देने का सौभाग्य पा लिया था रानी की बहन होकर भी वह कारागृह में कष्ट भोग रही थी राज महलों को छोड़कर उसने तहखाने में रहकर कष्टों को समता पूर्वक सहा और जब संयोग बना तो उसने भगवान को आहार दिया नगर में जय जय कार हो गई वर्धमान का आहार राज महल में नहीं हुआ रानी की छोटी बहन चंदनबाला ने भगवान को आहार देने का सौभाग्य पाया जैन मुनि धन वैभव को देखकर नहीं बरन भक्तों की भक्ति को देखकर आहार ग्रहण करते हैं और भक्तों के द्वार पहुंच जाते हैं

उपरोक्त उद् गार वात्सल्य मूर्ति ओजस्वी वक्ता आज्ञानुवर्ती परम शिष्य मुनि श्री समता सागर जी महाराज ने अपने प्रातः कालीन प्रवचन ओं में दिगंबर जैन धर्मशाला में अभिव्यक्त किए इस अवसर पर नन्हे मंदिर की महिला मंडल के द्वारा आचार्य श्री की सुसज्जित अष्ट द्रव्य से मंगल पूजन की गई इस मौके पर दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष सुधीर सिंघई कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के मंत्री श्रेयांश लहरी प्रचार मंत्री सुनील वेजीटेरियन नन्हे मंदिर कमेटी के अध्यक्ष ग्रीस अहिंसा महामंत्री चक्रेश सर्राफ नेमचंद बजाज राजेश हिनौती राजेंद्र अटल अनिल फोटो अखिलेश पंडित जी गुड्डू भैया रिंकू सिंघई पवन चश्मा आदि की उपस्थिति रही

 

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