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मध्य प्रदेश 750 MCM पानी उत्तर प्रदेश को देने के लिए तैयार हो गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में समझौता पत्र पर हस्ताक्षर हो गए

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नदी जोड़ो अभियान का जो सपना देखा था, उसे सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साकार किया। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना (केन-बेतवा लिंक) के समझौता-पत्र पर हस्ताक्षर किए।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजना बुंदेलखंड का भाग्य बदलेगी। इससे प्यास भी बुझेगी और विकास भी होगा। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने आज सिर्फ कागज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, बल्कि बुंदेलखंड की भाग्यरेखा को नया रंग-रूप दिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लाखों परिवारों के हित में जो सपना देखा था, उसे साकार करने के लिए आज समझौता हुआ है। यदि आज कोरोना न होता तो झांसी या बुंदेलखंड में आकर कार्यक्रम करते और लाखों लोग आकर आशीर्वाद देते। दोनों राज्य के मुख्यमंत्रियों और सरकार ने इतना बड़ा काम किया है कि इसे हिंदुस्तान के पानी के उज्जवल भविष्य के लिए स्वर्णाक्षरों से लिखा जाएगा। यह मामूली काम नहीं है। सिर्फ कागज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इन्होंने बुंदेलखंड की भाग्यरेखा को नया रंग-रूप दिया है। बुंदेलखंड की भाग्य रेखा को बदलने का काम किया है। बुंदेलखंडवासियों की भी जिम्मेदारी है कि इस काम में इतना जुट जाएं ताकि यह काम हमारी आंखों के सामने पूरा हो जाए और खेत हरे-भरे दिखने लगें। परियोजना से लाखों लोगों को पानी तो मिलेगा ही, बिजली भी मिलेगी। प्यास भी बुझेगी और प्रगति भी होगी।

62 लाख लोगों को मिलेगा पानी

जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज सुनहरा अध्याय लिखा गया है। पांच साल में नदी जोड़ने की दिशा में काम हुआ है। केन-बेतवा नदी को जोड़ने के लिए दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सहमति दी है। इससे बरसों से प्यासी बुंदेलखंड की धरती के लाखों लोगों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन आने वाला है। 62 लाख लोग पीने के पानी के लिए तरसते थे। इन्हें प्रचुरता के साथ सतत रूप से पेयजल उपलब्ध रहेगा। दोनों राज्यों में 12 लाख हेक्टेयर भूमि में दो-तीन बार फसल ली जा सकेगी। इससे कई गुना आमदनी बढ़ेगी। यह योजना का श्रीगणेश ही नहीं बल्कि नए युग का सूत्रपात हो रहा है। कार्यक्रम में केन-बेतवा परियोजना को लेकर लघु फिल्म भी दिखाई गई।

मध्य प्रदेश के नौ जिलों को फायदा

मध्य प्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन जिले को परियोजना से सीधा फायदा होगा। इसके अलावा अप्रत्यक्ष रूप से कई जिले लाभान्वित होंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर को इसका लाभ मिलेगा।

परियोजना की लागत – 35,111 करोड़ रुपये जिसमे  केंद्र सरकार  90 फीसद राशि देगी और राज्य सरकारें पांच-पांच फीसद राशि देंगी

केन-बेतवा लिंक परियोजना की प्रष्ठभूमि :-

केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मामला जल के बंटवारे को लेकर उलझा हुआ था। मुख्यमंत्री, जल संसाधन मंत्री और अधिकारियों के स्तर पर कई दौर की बैठकों के बाद जब दोनों राज्य थोड़ा-थोड़ा झुके तो बात बन गई। दरअसल, उत्तर प्रदेश रबी सीजन के लिए सिंचाई और पीने के पानी के लिए 930 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी मांग रहा था और मध्य प्रदेश 700 MCM से ज्यादा पानी देने के लिए तैयार नहीं था।

तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी की मध्यस्थता से चर्चा का दौरा प्रारंभ हुआ और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की पहल के चलते दोनों राज्य थोड़ा-थोड़ा झुके और बात बन गई। मध्य प्रदेश 750 MCM पानी उत्तर प्रदेश को देने के लिए तैयार हो गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में समझौता पत्र पर हस्ताक्षर हो गए।

केंद्र सरकार ने 2009 में केन-बेतवा लिंक परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था। यह छतरपुर और पन्ना जिले में स्थित है। अप्रैल 2018 में केंद्रीय जल संसाधन सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश की ओर से रबी सीजन के लिए 700 MCM पानी उत्तर प्रदेश को देने पर सहमति दी। बैठक का जो कार्यवारी विवरण बना, उसमें उत्तर प्रदेश को 788 MCM पानी आवंटित किया गया, जिस पर राज्य सरकार ने 24 मई 2018 को पत्र लिखकर असहमति जताई। 20 जुलाई 2020 को नई दिल्ली में फिर बैठक हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव ने रबी सीजन में सिंचाई और पीने के पानी के लिए फिर से मांग बढ़ाकर 930 MCM करने का अनुरोध किया।

22 सितंबर 2020 को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के जल संसाधन मंत्रियों के साथ बैठक की और निर्णय लिया कि दोनों राज्य केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए मेमोरेंडर ऑफ एग्रीमेंट (MoA) के प्रारूप पर टिप्पणी भेजें। छह नवंबर 2020 को भोपाल में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गतिरोध दूर कराया जाएगा।

बैठक में उन्होंने केंद्रीय जलशक्ति मंंत्री से गतिरोध शीघ्र दूर करने का आग्रह भी किया। नौ जनवरी 2021 को भोपाल में केंद्रीय मंत्री ने बैठक की। इसमें उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश का अहित नहीं होने देंगे। इसके बाद मामला तेजी के साथ आगे बढ़ा और मध्य प्रदेश 750 MCM जल बंटवारे के लिए तैयार हो गया। उत्तर प्रदेश भी इस पर सहमत हो गया और दोनों राज्यों के बीच समझौता हो गया।

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