RELIGIOUS

आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हुए एलाचार्य श्री अतिवीर जी मुनिराज

त्रिलोक तीर्थ प्रणेता, पंचम पट्टाचार्य परम पूज्य गुरुवर आचार्य श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज की असीम अनुकम्पा से गुरुभ्राता परम पूज्य सल्लेखनारत आचार्य श्री 108 मेरु भूषण जी महाराज द्वारा अपने परम प्रभावक अनुज-भ्राता परम पूज्य एलाचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज को सभी मांगलिक क्रियाएं संपन्न कर विधि-विधान पूर्वक ‘आचार्य पद’ पर दिनांक 20 दिसम्बर 2020 को एम. डी. जैन इण्टर कॉलेज ग्राउंड, हरी पर्वत, आगरा (उ.प्र.) में विशाल धर्मसभा के समक्ष प्रतिष्ठित किया गया| समारोह के प्रारम्भ में प्रातः काल की प्रत्युष बेला में एलाचार्य श्री का केशलोंच संपन्न हुआ| तत्पश्चात श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में श्री गणधर वलय विधान आयोजित किया|

आगरा दिगम्बर जैन परिषद् तथा श्री दिगम्बर जैन शिक्षा समिति, आगरा के पदाधिकारी तथा समाज के विशिष्ट महानुभावों द्वारा आचार्य संघ को श्रीफल अर्पित कर भव्य पण्डाल में भक्तिभाव पूर्वक भव्य स्वागत किया गया| धर्म-सभा के शुभारम्भ में सर्वप्रथम श्री भोलानाथ जैन सिंघई परिवार द्वारा पंडाल उद्घाटन किया गया तथा श्री प्रदीप कुमार जैन ‘पीएनसी’ परिवार द्वारा विधिवत ध्वजारोहण संपन्न हुआ| श्री विमलेश जैन मार्सन्स परिवार द्वारा मंच उद्घाटन के पश्चात् आचार्य संघ मंचासीन हुआ| मंगलाचरण के साथ विशिष्ट महानुभावों द्वारा श्री जिनेन्द्र प्रभु, गुरुवर आचार्य श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज तथा आचार्य श्री 108 मेरु भूषण जी महाराज के चित्र का अनावरण किया गया| सौभाग्यशाली परिवारों द्वारा जिनवाणी विराजमान, दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट आदि मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुईं| दिल्ली से पधारे गुरुभक्त श्री राकेश जैन (अशोक विहार), श्री पंकज जैन ‘नीटू’ (कैलाश नगर), श्री सुनील जैन ‘जयवीर’ (ऋषभ विहार), श्री अंकुर जैन (सूर्य नगर), श्री राजेश जैन (कैलाश नगर), श्री मुकेश जैन (अशोक विहार), श्री विक्रांत जैन (अशोक विहार) तथा श्री समीर जैन (पीतमपुरा) द्वारा एलाचार्य श्री का सर्वोषधि द्वारा पाद प्रक्षालन किया गया|

भव्य समारोह में आचार्य श्री 108 मेरु भूषण जी महाराज, एलाचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज के साथ गणिनी आर्यिका श्री 105 सृष्टि भूषण माता जी, क्षुल्लक श्री 105 योग भूषण जी महाराज, क्षुल्लिका श्री 105 तृप्ति भूषण माता जी, क्षुल्लिका श्री 105 पूजा भूषण माता जी तथा क्षुल्लिका श्री 105 भक्ति भूषण माता जी का परम सान्निध्य भी प्राप्त हुआ| अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद् से विद्वतजन डॉ. श्रेयांस जैन (बड़ौत), ब्र. जय कुमार जैन ‘निशांत’ (टीकमगढ़), डॉ. नलिन के. शास्त्री (लाडनूं), डॉ. विनोद जैन (रजवांस), डॉ. अमित जैन ‘आकाश’ (वाराणसी), पं. अशोक जैन शास्त्री ‘धीरज’ (दिल्ली), पं. जिनेन्द्र जैन शास्त्री (मथुरा) आदि स्थानीय विद्वानों ने उपस्थित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई तथा आचार्य पद की सहर्ष अनुमोदना कर अपनी स्वीकृति प्रदान की|

आचार्य श्री मेरु भूषण जी महाराज ने अपनी मंगलमयी आशीषवर्षा से उपस्थित भक्तों को सरो-बार करवाया| आचार्य श्री ने कहा कि जीवन का लक्ष्य शरीर और आत्मा के भेद विज्ञान को प्राप्त करना है| इसी से आत्मा परमात्मा बनेगी| आचार्य श्री ने आगे कहा कि गुरुवर आचार्य श्री ने अपने प्रिय शिष्य तथा हमारे अनुज-भ्राता अतिवीर जी महाराज की योग्यता को देखते हुए एलाचार्य पद पर सुशोभित किया| एलाचार्य ही आगे चलकर भावी आचार्य होता है| इसलिए गुरुवर के संकेत को देखते हुए उनकी समाधी के पश्चात् आज हम उनका यह अधूरा कार्य पूर्ण कर रहे हैं| एलाचार्य श्री अतिवीर जी मुनिराज ने कहा कि हमारे जीवन में गुरुओं का बहुत उपकार है तथा आज हमारे अग्रज-भ्राता पूज्य आचार्य श्री की कृपा-वर्षा हम पर हो रही है| हमारे द्वारा आचार्य पद की गरिमा व प्रतिष्ठा को कभी चोट न पहुंचे, ऐसा हम जीवन भर प्रयासरत रहेंगे|

डॉ. श्रेयांस जैन (बड़ौत), डॉ. नलिन के. शास्त्री (लाडनूं), श्री स्वदेश भूषण जैन (पंजाब केसरी) ने अपने उद्बोधन में इन पलों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आज जैन धर्म की प्रभावना में नवीन कीर्तिमान स्थापित होने जा रहा है| आगरा जैन समाज ने आचार्य श्री व एलाचार्य श्री के चरणों में शीतकालीन प्रवास हेतु निवेदन किया| प्राचीन श्री अग्रवाल दिगम्बर जैन पंचायत, धर्मपुरा (दिल्ली) के पदाधिकारियों ने एलाचार्य श्री से शीघ्र दिल्ली आगमन हेतु निवेदन करते हुए कहा कि आचार्य पदारोहण के पश्चात् दिल्ली जैन समाज द्वारा लाल मंदिर में ऐतिहासिक अभिनन्दन समारोह का आयोजन करने का भाव है| शकरपुर जैन समाज ने एलाचार्य श्री के चरणों में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा हेतु निवेदन किया तथा रानी बाग जैन समाज ने आगामी अष्टाह्निका पर्व के अवसर पर श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान हेतु निवेदन किया| एलाचार्य श्री ने सभी के निवेदन सहर्ष स्वीकार किये|

इसके पश्चात् पूज्य आचार्य श्री ने विराजमान समस्त साधु संघ, विद्वत-वर्ग तथा उपस्थित सभी श्रद्धालुओं की अनुमति से एलाचार्य श्री अतिवीर जी मुनिराज के ‘आचार्य पद’ संस्कार का शुभारम्भ किया| संस्कार के लिए निर्मित ठोस चबूतरे पर पूज्य आचार्य श्री एवं एलाचार्य श्री विराजमान हुए| ब्र. पुष्पेंद्र जैन शास्त्री (दिल्ली) तथा पं. धरणेन्द्र जैन शास्त्री (ललितपुर) के प्रतिष्ठाचार्यत्व में तथा विशाल जन-समुदाय के समक्ष ‘आचार्य पद’ के संस्कार प्रारम्भ हुए| संस्कारों के पश्चात् नव प्रतिष्ठित आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज को श्री पुनीत जैन सपरिवार (गन्नौर) द्वारा नवीन मयूर पिच्छिका प्रदान की गयी तथा सौभाग्यशाली महानुभावों द्वारा कमण्डलु प्रदान व शास्त्र भेंट किए गयें| पूज्य आचार्य श्री द्वारा पुरानी पिच्छी श्री मनोज जैन (निर्माण विहार) को प्रदान की गई| मंच पर विराजमान समस्त साधु-वृन्द की मंगल आरती विशेष रूप से सजाये गए दीपकों द्वारा की गई| इस अवसर पर गणिनी आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माता जी की पिच्छी परिवर्तन भी की गयी|

आचार्य पद प्रतिष्ठापन समारोह अत्यंत आनन्द पूर्वक भव्यता से संपन्न हुआ| इस समारोह में आगरा व निकटवर्ती नगरों के साथ-साथ राजधानी दिल्ली से गुरु-भक्त तथा मथुरा, कोसी, पलवल, होडल, बल्लभगढ़, फरीदाबाद, भरतपुर, मुरैना, मुंबई, बडौत, गाजियाबाद, नॉएडा, गुडगाँव, इन्दौर आदि विभ्भिन स्थानों से भारी संख्या में धर्मानुरागी बंधुओं ने सम्मिलित होकर विशेष पुण्यार्जन किया| भव्य कार्यक्रम के पश्चात् समस्त आगंतुक बंधुओं के लिए स्वरूची भोज की व्यवस्था की गई थी जिसका सभी ने खूब आनन्द लिया| यह कार्यक्रम जैन इतिहास में एक अनूठा कार्यक्रम था तथा एक ऐतिहासिक रूप लेकर सानन्द संपन्न हुआ|

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