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कुंडलपुर महामहोत्सव : दुनिया के सबसे ऊंचे जैन मंदिर का होगा पंचकल्याणक महोत्सव, तिथि की हुई शुभ घोषणा

वसंत पंचमी पर आचार्यश्री विद्यासागर महाराज कुंडलपुर में पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव की तिथि की शुभ घोषणा की 

बुंदेलखंड की ऐतिहासिक नगरी कुंडलपुर में पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव की तिथि की शुभ घोषणा हो गई है। वसंत पंचमी पर आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने पहली बार हो रहे 11 दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव की कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारियों से चर्चा के बाद की यह घोषणा की।

12 फरवरी से शुरू होगा 22 फरवरी तक होने वाले इस आयोजन में देशभर से 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। 200 से अधिक मुनि संघ कुंडलपुर में पहले से मौजूद हैं, कुछ मुनि संघों का कुंडलपुर की ओर विहार जारी है। पहले यह आयोजन 5 फरवरी से होना था, लेकिन कोरोना केस बढऩे के चलते इसे टाल दिया। अब कोरोना केसों में गिरावट और आचार्यश्री की सहमति के बाद कुंडलपुर कमेटी के अध्यक्ष संतोष सिंघई ने यह जानकारी दी।

आप को बता दे की आचार्यश्री विद्यासागर महाराज का 5 दिसंबर 2021 को का कुंडलपुर में प्रवेश हुआ। उसके बाद निर्यापक मुनि समयसागर, निर्यापक मुनि योगसागर, मुनि प्रशांतसागर, मुनि विमलसागर, अजितसागर, सौम्यसागर सहित कई अन्य संघ कुंडलपुर पहुंच चुके हैं। जिले के इसरवारा में जन्मे चतुर्थ निर्यापक मुनि सुधासागर भी 8 वर्ष बाद कुंडलपुर पहुंच रहे हैं।

189 फीट ऊंचाई, सिर्फ पत्थरों से काम
दमोह जिला मुख्यालय से 36 किमी दूर स्थित जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में बड़े बाबा के मंदिर निर्माण कार्य पूरा हो गया। इसके शिखर की ऊंचाई 189 फीट है। दुनिया में अब तक नागर शैली में इतनी ऊंचाई वाला मंदिर नहीं है। मंदिर की ड्राइंग डिजाइन अक्षरधाम मंदिर की डिजाइन बनाने वाले सोमपुरा बंधुओं ने तैयार की है। मंदिर की खासियत है कि इसमें लोहा, सरिया और सीमेंट का उपयोग नहीं किया है। इसे गुजरात व राजस्थान के लाल-पीले पत्थरों से तराशा गया है। पत्थर को दूसरे पत्थर से जोडऩे के लिए भी खास तकनीक का इस्तेमाल किया है।

63 मंदिर हैं स्थापित
प्राचीन स्थान कुंडलपुर को सिद्धक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। यहां 6& मंदिर हैं, जो 5वीं-6वीं शताब्दी के बताए जाते हैं। क्षेत्र 2500 साल पुराना बताया जाता है। कुण्डलपुर सिद्ध क्षेत्र अंतिम श्रुत केवली श्रीधर केवली की मोक्ष स्थली है। यहां 1500 वर्ष पुरानी पद्मासन श्री 1008 आदिनाथ भगवान की प्रतिमा है, जिन्हें बड़ेबाबा कहते हैं।

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