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कोरोना जैसी महामारी आएगी चली जाएगी , स्वस्थ रहने को शाकाहार और साधु सन्तो का संयमित जीवन चर्या अपनाए आचार्य श्री

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने एक निजी समाचार पत्र से विशेष चर्चा में उन्होंने विभिन्न विषयो पर चर्चा की। कोरोना को लेकर आचार्य श्री ने कहा कोरोना जैसी महामारी आएगी चली जाएगी। स्वस्थ्य रहने के लिए शाकाहार और साधु सन्तो का संयमित जीवन शैली अपनानी होगी। कोरोना से कही लोगो का रोजगार गया है, सरकार को राजनीति की चिंता छोड़कर भुखमरी और पलायन को रोकना चाहिए। गावो में शहर जैसी सुविधा देगे तो उन्हे शहर भागने की जरूरत नही पड़ेगी। आचार्य भगवन 5 जनवरी को इंदौर आए थे, दीक्षा के बाद सम्भवतया इंदौर ऐसा पहला शहर बन गया है, जिसे उनका इतना लम्बा सानिघ्य मिला है।

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की जीवन शैली ऐसी है

आहार एक भाग भोजन,दो भाग पानी, एक भाग खाली

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को दीक्षा ग्रहण किए 50 वर्ष से अधिक समय हो गया। तब से नमक मीठा नही खाते। एक शिष्य ने उनसे कि बिना नमक के सब्जी कैसे खा पाते है तो जवाब दिया तुम भोजन में नमक, मिर्च आदि का स्वाद लेते हो, लेकिन मैं प्राकृतिक अन्न लेता हूं। वे हरी सब्जी, हरे फल, ड्राय फूट्स, मावा, तले पदार्थ का उपयोग नही करते। एक भाग भोजन, दो भाग पानी और दो भाग खाली(उनोदर तप) का पालन करते है।

आचरण : वे बिजली से चलने वाले उपकरणो का उपयोग नही करते है। इलेक्ट्रॉनिक संसाधन से परहेज करते है। प्राकृतिक जीवन शैली का पालन करते है। रात्रि विश्राम व चिंतन में व्यतीत करते है। और दिन ध्यान, अध्यन, अध्यापन आदि। ज्यादातर मोन रहते है। प्रवचन भी सीमित देते है। इसके बजाय आचरण से शिक्षा देने का प्रयास करते है। कभी दीवार पर टिकते नही, दिगंबर व्रती के कारण कभी दरवाजा भी नही लगाते है।

आत्मोन्नति साईबान के लिए करते है प्रेरित

आचार्य कहते है कि पैरों का मर्दन, आंखों का बंधन, मन मस्तिष्क को चिंतन ये आत्मा के विकास में मार्ग है। आसन और अशन (आहार) की शुद्धि ध्यान की और प्रवृत करती है। वे लोगो की तरफ बहुत कम द्रष्टि करते है। गांधारी का उदाहरण देते है। शिष्यों को साईबान के लिए प्रेरित करते है। साईबान घोड़ो की आंख पर बांधी जाने वाली पट्टी को कहते है, जिससे वह एक दिशा मे देखता है।

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कुच्छ विषयों पर अपने भाव प्रकट किये

ऑनलाइन शिक्षा  – यह भारतीय परंपरा नही है। जब तक विद्यार्थी शिक्षक सामने नही होगा, उसके भाव पढ़ने के नही बनेगे। ये व्यवस्था अल्प समय की है।

रोजगार का संकट– व्यवसायिक लोगो को मशीनरी का उपयोग न कर गरीब जनता को काम देना चाहिए। कोरोना के कारण जो क्षति उसकी पूर्ति हो जाएगी।

राजनीति– राजनीति और धर्मनीति अलग अलग है। धर्मनीति में इंसान और ईमान बराबर होते है। राजनीति में अलग अलग।
पड़ोसी देशों को बढ़ता दवाब- भारत में शाकाहार का प्रचलन ज्यादा है इसीलिए हर मसले पर सोच समझकर शान्तीपूर्वक निर्णय करते है। कोई भी देश भारत का कुछ भी नही बिगाड़ पाएगा। हमारे पास अहिँसा की शक्ति है।

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