RELIGIOUS

आचार्य श्री १०८ विद्या सागर जी महाराज ने रविवार को कन्नोद गाव में रविवार को मंगल प्रवेश किया

आचार्य श्री ने प्रवचन में कहा अपने यहां 24 तीर्थंकर भगवान दयालु राजपूत हुए है। प्रायः करके जैनियों को लोग बनिया के रूप में ही स्वीकारते है। राजपूत ओर क्षत्रिय हुए है और उन्होंने अपनी सेवा धरती के लिए, जनता के लिए पहुचाते आ रहे है किंतु बदले में कुछ मांगते नही। सेवा का फल क्या मिलना है इसकी ओर भी वो राजपूत कभी अपना ध्यान नही देते।

ऐसे हमारे 22वे तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान के बारे में बताता हूँ कि वे अपनी शादी के लिए जा रहे थे बारात लेकर। उन्होंने देखा बहुत सारे पशु रो रहे थे, चिल्ला रहे थे और इस प्रतीक्षा में थे कि कोई दयालु यादव (नेमिनाथ भगवान यादव वंश के थे, जो पशु ओर पक्षियों के लिए याद रखते है वे यादव होते है), जब नेमि कुमार ने पशुओं की चीख ध्वनि सुनी और कहा कि यदि मेरे विवाह के लिए इनको लेते हो तो हम जीवन पर्यंत के लिए शादी का त्याग कर देते है ओर उन्हें वैराग्य हो जाता है और वे नेमीगिरी गिरनार पर्वत की ओर चल देते है। हज़ारो वर्षो के उपरांत भी प्रतिदिन हज़ारो लोग उस पहाड़ी पर चढ़ जाते है। उनको स्मरण में लाते है। ऐसे दया के स्वामी थे वे, आप लोगो को याद करना चाहिए क्योंकि दया एक प्रकार से धर्म है।

दया को जिसने धर्म के रूप में नही स्वीकारा, मनुष्य अपने लिए तो करता सब कुछ लेकिन पशुओं को पालते-पालते उनके लिए भी करता है, ऐसे दया करने वाले यादव आज भी है और गाँव- गाँव मे फैले हुए है ओर गाय भैस को पालते है। कृषि का संचालन आज भी करते है। तो हम अपने जीवन को चलाने के लिए माँस भक्षण, शराब पीना करते है तो बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। ये यादव लोग याद रखते है और कुछ पश्चिमी शहरी हवा से भूल जाते है तो साधु संतों को देख करके जीवन पर्यंत के लिए त्याग कर देते है।

शास्त्रों में उल्लेख किया है की  गाय को कामधेनु कहते है

आचार्य श्री ने प्रवचन में कहा आप लोगो ने सुना होगा कि गाय मात्र विशेष ही होते है सामान्य नही। उनके अनेक भेद होते है फिर भी शास्त्रों में उल्लेख किया है की उन्हें कामधेनु कहते है, कामधेनु का अर्थ की आप लोग कामना करेंगे और वह गाय उसको पूर्ण करेगी। संतो को कुछ अपेक्षा नही होती तो झूठ क्यो बोलेंगे? किसी ने यह प्रसंग सुनाया की एक विदेशी महिला है, अपनी गोद मे विणा लेकर बैठी है और जो उससे ध्वनि निकली है। वही समीप में गाय बैठी थी जो उस धुन में मग्न होकर के अपने आप ही दूध देने लगी। आप उसे मार भी लेते हो तो वह दूध नही देती ओर सींग दिखाती है और यदि प्रेम ओर वात्सल्य देंगे तो वह दूध भी अमृत तुल्य आपको देगी क्योंकि उसमें संवेदना है और चेतना है। आप फिर भी उसका उपकार नही मानते है और दूध तो ले लेते है लेकिन उसको खाने के लिए छोड़ देते है, कचरा देते है। बुद्धि मिली है आपको आप सदुपयोग करो, शास्त्रों में जो कामधेनु कहा है उससे सिख लो। भारत मे तो आप बाजा बजाओ तो भी दूध की नदिया बहती थी क्योंकि पशुओं के प्रति संवेदना होती थी। गीता आदि पुराण ग्रंथो के सुनने से भी गाय के दूध में वृद्धि होती है और विदेश में यह अहिंसा के नाम से प्रचलन में आ रहा है। परोपकार की भावना खत्म तो गाय ने भी दूध देना बंद कर दिया। अब तो भारत बाते करता है जैसे पतझड़ में पत्ते मात्र बाते करता है, पत्ते मतलब ताश के पत्ते होते है वो नही। शराब-मांस के लिए अगर सरकार ही छूट दे दे तो देश कैसे तरक्की करेगा। प्रकृति की सब चीज़े प्रकृति में रहती है, आप सदैव एयर कंडीशन में रहते है, आज स्वास हेतु शुद्ध वायु नही, शुद्ध पानी नही एवं इधन भी खत्म। अब तो गैस आ गई है इसीलिए गैस की बिमारी हो रही है, भयानक रोग हो रहे है।

 

आप को बाता दे की आचार्य श्री का अभी विहार चल रहा है , सोमवार को आहार चर्या कन्नोद गाव में ही होगी, उसके बाद दोपहर में विहार होगा। मंगलवार को खातेगाव में मंगल प्रवेश होगा, वहा की समाज द्वारा मंगलप्रवेश की तैयारी की जा रही है। सम्भावना है की बुधवार को आचार्य श्री सहित सम्पूर्ण संघ का मंगल प्रवेश नेमावर तीर्थ क्षेत्र पर हो जाएगा।


Discover more from VSP News

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply