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3 मई तक बढ़ा लॉकडाउन, 20 अप्रैल से सीमित क्षेत्रों में सशर्त सीमित छूट मिलेगी- मोदी

25 मार्च को लागू हुए देशव्यापी लॉकडाउन का आज आखिरी दिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 25 मिनट देश को संबोधित किया। उन्होंने 3 मई तक देश में लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान किया। यह भी कहा कि 20 अप्रैल से कुछ जरूरी चीजों की अनुमति दी जाएगी। अगर आपके इलाके में कोरोना पैर पसारता है तो ये अनुमति तुरंत वापस ले ली जाएगी। पिछले 26 दिन में मोदी का देश के नाम यह चौथा संदेश है।

देश के नाम संबोधन में मंगलवार को सुबह 10 बजे पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए देश में 3 मई तक लॉकडाउन जारी रहेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि 20 अप्रैल के बाद कुछ सीमित सेक्टर्स में सशर्त सीमित छूट दी जा सकती है। मगर कोरोना वायरस के मामलों में कमी नहीं दिखने पर इसे वापस ले लिया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि देश पूरी मजबूती के साथ कोरोना वायरस महामारी से लड़ रहा है। जिस तरह से देशवासियों ने त्याग और तपस्या का परिचय दिया है, वह कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अहम है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 24 मार्च को 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी, जिसकी अवधि मंगलवार यानी आज खत्म हो रही है।

कोविड-19 पहले से ही एक भी मामला सामने आने से भारत सरकार सक्रिय हो 

प्रधानमंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि देश में कोविड-19 का एक भी मामला सामने आने से काफी पहले से ही भारत अत्‍यंत सक्रिय हो गया था। उन्‍होंने कहा, ‘विदेश से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग; विदेश से आने वाले यात्रियों के 14 दिन का अनिवार्य आइसोलेशन; मॉल, क्लब, जिम को बंद करने जैसे निर्णय इसके शुरुआती चरणों में ही ले लिए गए थे।’  प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अत्‍यंत सक्रियता का परिचय देते हुए संपूर्ण लॉकडाउन का एक बड़ा कदम भी उठा लिया, जो 14 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।

उन्होंने कहा कि विश्व के अन्य कोविड प्रभावित बड़े और सामर्थ्यवान देशों की तुलना में भारत बहुत संभली हुई स्थिति में है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को लॉकडाउन से काफी लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि आर्थिक संकटों का सामना करने के बावजूद यही स्पष्ट रूप से बिल्‍कुल सही मार्ग है क्योंकि इसने देश में अनगिनत लोगों की जान बचाई है।

उन्‍होंने कहा, ‘यदि केवल आर्थिक दृष्टि से देखें तो यह नि:संदेह अभी महंगा प्रतीत होता है, लेकिन भारतवासियों की जिंदगी के आगे इसकी कोई तुलना नहीं हो सकती। भारत सीमित संसाधनों के बीच जिस मार्ग पर चला है, वह आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है।’

 

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