NATIONAL विचार

सतत् संवाद से संभव होता विकास और बदलाव

-विष्णुदत्त शर्मा

विश्व के सबसे लोकप्रिय राजनेता प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी की संवादपरकता का लोहा सारी दुनिया मानती है। आज सांसार के सभी शक्तिशाली लोग उनसे मिलने को आतुर रहते हैं। विविध क्षेत्रों की श्रेष्ठ शख्सियतें भी मोदी की मुरीद हैं। किसी बड़े देश का राष्ट्राध्यक्ष हो या बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी का मुखिया, वह भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का सानिध्य चाहता है। हाल की उनकी अमेरिका यात्रा के दौरान यह दृश्‍य सभी ने देखा है। अमेरिकी कॉंग्रेस में मोदी के भाषण के दौरान भी मोदी-मोदी के नारे से सीनेट लगातार गूँजता रहा था।

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अमेरिका में मोदी के नेतृत्व में रिकॉर्ड बन गया, जहां एक साथ 137 देशों के लोगों ने योग किया। भारतीय योग का परचम फहराने वाले  श्री नरेंद्र मोदी की यह विशिष्टता है, कि वे बड़ी चीजों पर जितना ध्यान देते हैं, उससे कहीं अधिक छोटी दिखने वाली चीजों पर देते हैं। भारत से बाहर वे जहां भी जाते हैं, वहां प्रवासी भारतीयों से अवश्य मिलते हैं और उनसे संवाद करते हैं।अत्यंत व्यस्त होते हुए भी प्रधानमंत्री ने अमेरिका के एक हजार प्रवासी भारतीयों से संवाद किया। मोदी एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनका भाषण सुनने विदेशों में भी हजारों लोग लालायित रहते हैं। अमेरिकन कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष भरत बरई के मुताबिक वैश्विक भारतीय डायस्पोरा के लिए मोदी सबसे लोकप्रिय भारतीय प्रधानमंत्री हैं और अब वह सबसे लोकप्रिय विश्व नेता हैं।

दरअसल, जनतंत्र में लोकप्रियता का सूत्र है सतत् संवाद। जहां संवाद नहीं होगा, वहां लोकप्रियता नहीं होगी। संगठन में शुरु से ही श्री नरेंद्र मोदी जी अपनी संवाद शैली से जाने जाते रहे हैं। उनके रग-रग में संगठन-भाव है। शीर्ष पद पर बैठकर भी वे जितनी सहजता से ताकतवर नेताओं व उद्योगपतियों आदि से संवाद करते हैं, उससे कहीं अधिक सहजता से वे अपने कार्यकर्ताओं से संवाद करते हैं। निचले पायदान पर सक्रिय कार्यकर्ताओं से संवाद का कोई भी अवसर वे नहीं छोड़ते। यही कारण है कि भाजपा का हर कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी से जुड़ा हुआ महसूस करता है। कार्यकर्ताओं के प्रति उनका कुटुंब-भाव यह दर्शाता है कि भाजपा एक कैडर आधारित दल है। जहां कोई भी कार्यकर्ता अपने बीच से निकले प्रधानमंत्री से सहज संवाद कर सकता है। दशकों पहले संगठन-कार्य करते हुए मोदी जी ने यह विश्वास स्थापित किया है। नेतृत्व की यह विशेषता ही हम सबकी थाती है। संगठन में सतत् संवाद भाजपा की विरासत है, जिसे मोदी जी ने नयी ऊँचाई दी है। तकनीकी उपयोग द्वारा उन्होंने इस परंपरा को नयी पहचान दी है। नमो एप के जरिये देशभर के कार्यकर्ताओं का उनसे सतत् संपर्क संभव है। साथ ही सरकार की योजनाओं और प्रधानमंत्री का संदेश नीचे तक सीधे पहुंचता है।

आज भोपाल में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में कार्यकर्ताओं का महाकुंभ इस कड़ी में एक नया अध्याय लेकर आया है। ‘मेरा बूथ-सबसे मजबूत’ कार्यक्रम के जरिये मोदी जी देशभर के 10 लाख बूथों के करोड़ों कार्यकर्ताओं से संवाद का इतिहास रचेंगे। राजनीतिक इतिहास में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क का यह आयोजन एक जनप्रिय नेता ही कर सकता है। यह संकल्प वही पूरा कर सकता है, जो कार्यकर्ताभाव से भरा हुआ हो। ये उसी नेता के द्वारा संभव है, जो मूल तत्व के महत्व को समझता हो और उसे सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हो।

बड़े-बड़े पुराने दल के नेता आज दर-बदर घूम कर समर्थन जुटाने में व्यस्त हैं। सत्ता के लिए वे न जाने कितने दरवाजे खटखटा रहे हैं। जिनके पास नेता और कार्यकर्ता दोनों का अभाव है, उनसे भी दोस्ती की भीख मांग रहे हैं। परन्तु कार्यकर्ता आधारित पार्टी का नेता विदेश से लौटकर सीधे अपने बूथ की ओर देख रहा है। वह अपने बूथ के कार्यकर्ता से सीधे संवाद करने के लिए हाजिर है। यही है पार्टी विथ डिफरेंस। यहां कार्यकर्ताओं की अहमियत का अंदाजा बात से लगाया जा सकता है कि गुजरात विधानसभा चुनाव की जीत के बाद मोदी जी ने कहा था कि इस विजय में पन्ना और बूथ समितियों के कार्यकर्ताओं की अतुलनीय भूमिका है।

उल्लेखनीय है कि आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा जमीन से लेकर डिजीटल तक सभी प्रकार के प्लेटफार्म पर दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है। ‘मेरा बूथ-सबसे मजबूत’ अभियान से जुड़े जिन कार्यकर्ताओं से आज मोदी जी संवाद करेंगे, उनकी चयन प्रक्रिया भी एक लोकतांत्रिक इतिहास का अहम पड़ाव बन गया है। इसके तहत देश के सभी विधानसभा और लोकसभा से दस-दस नाम चुने गये। ये नाम देशभर के सभी प्रमुख नेताओं को सौंपे गये, जिन्होंने इन दस बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार लिये। बूथ से जुड़े प्रश्नों को लेकर बनाए गये मानदंडों पर बेहतर प्रदर्शन वाले प्रत्येक लोकसभा से पांच-पांच लोग मिलाकर कुल तीन हजार लोगों का चयन हुआ, जो भोपाल में प्रधानमंत्री से संवाद के लिए प्रत्यक्ष उपस्थित हो रहे हैं। इसके अलावा देशभर के 10 लाख बूथों के करोड़ों कार्यकर्ता भी डिजिटल तौर पर मोदी जी से सीधे जुड़ेंगे।

कार्यकर्ता आधारित संगठन की घोषणा को चरितार्थ करने वाला यह समागम ऐतिहासिक है। यह इस बात का भी प्रमाण है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री श्री  अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा के भीतर मौजूद कार्यकर्ताभाव के कारण आज देश में गरीब कल्याण की योजनाएं जमीन पर उतर रही हैं।निरंतर संवाद के कारण ही आज देश में गरीबों और गांवों को ध्यान में रखकर नीतियां और योजनाएं बनती हैं। एक साधारण कार्यकर्ता से चलकर देश में शीर्ष पायदान तक पहुंचने वाले मोदी जी का साधारण कार्यकर्ताओं से संवाद उत्प्रेरक का काम करता है। उनका यह कदम मौजूदा चुनौतियों से निपटने और आगे के विकास और बदलाव के लिए मार्ग भी दिखाता है।

वस्तुतः भाजपा में नेता और कार्यकर्ता एक दूसरे के पूरक हैं। यहां परस्परता और सहकारिता की संस्कृति है। सभी का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण है। भाजपा सरकार की जनसेवा, सुशासन और गरीब कल्याण की नीतियों में कार्यकर्ता की अपनी भूमिका भी निहित है।यही वजह है कि आज अन्त्योदय की भावना से गरीबों के जीवन बदलने का सपना साकार हो रहा है।

दलगत व्यवस्था में जमीनी स्तर पर सतत् संवाद रखने वाला नेतृत्व समाज की समस्याओं का हल लेकर आता है। नेता, नीयत और नीति से ही जनकल्याण का संकल्प संभव है। जनभावनाओं से कटे हुए नेता विदेशों में जाकर देश की आलोचना करते हैं। उन्हें देश की नब्ज समझने का सलीका नहीं होता। गृह मंत्री श्री अमित शाह हर बूथ पर 51 प्रतिशत वोट हासिल करने का जो मंत्र देते हैं, उसमें यही संदेश निहित है कि कार्यकर्ता अपने बूथ पर अधिकांश लोगों तक अपना जीवंत संवाद बनाए रखे।  

पूर्व में मध्यप्रदेश की राज्य इकाई ने सफल बूथ विस्तारक अभियान चलाया था। चुनावी राजनीति में बूथ सशक्तिकरण का सामर्थ्य कैडर आधारित दल में ही है। देशभर के बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं का एक परिवार की तरह एकत्र होकर संकल्प लेना भी ऐतिहासिक है।भाजपा के पितृपुरुष श्री कुशाभाऊ ठाकरे की कर्मभूमि पर बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं के महाकुंभ में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में आयोजित ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत’ कार्यक्रम भाजपा की सकारात्मक राजनीति को एक नया संकल्प और एक नई शक्ति प्रदान करने वाला है। आज का दिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में किसी दल के नेता द्वारा कार्यकर्ताओं से संवाद का साक्षी बनेगा।

-लेखक भाजपा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष एवं खजुराहो लोकसभा से सांसद हैं


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