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विभाजनकारी षड्यंत्रों को परास्त कर धर्मरक्षार्थ एकजुट हुआ बाल्मीकि समाज

हरियाणा के गोहाना में विगत 23 अगस्त 2020 को विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष अधिवक्ता श्री आलोक कुमार द्वारा “महर्षि बाल्मीकि सामाजिक समरसता भवन” का शिलान्यास किया गया। “एक ही नारा एक ही नामजय बाल्मीकि – जय श्रीराम” के नारों से आसमान गूंज रहा था। हरियाणा के गोहाना शहर में, सामाजिक समरसता के क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक व क्रांतिकारी घटनाक्रम हुआ। इसका आयोजन वाल्मीकि त्रिकालदर्शी सोसाइटी के संचालक एवं वाल्मीकि धर्मपीठ के मुख्य सेवक दीपक आदित्य ने किया था। कार्यक्रम के सूत्रधार, शिल्पकार व प्रेरक हरियाणा विहिप के प्रांत उपाध्यक्ष व सेवानिवृत न्यायाधीश पवन कुमार जी थे। गोहाना तहसील के 52 गाँवों के 104 युवकों ने नीला पटका का परित्याग कर भगवा पटका धारण किया। प्रत्येक गाँव से केवल दो-दो युवाओं को ही सांकेतिक प्रतिनिधि के रूप में आमंत्रित किया गया था। चंद्रदेखर रावण की रावण सेना को त्यागकर युवाओं ने विश्व हिंदू परिषद के साथ मिलकर सनातन धर्म की थाती को सम्हालने का व्रत धारण किया। “जय मीम – जय भीम” के विभाजनकारी नारों का बाल्मीकि समाज द्वारा यह मुँहतोड़ जवाब था।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विहिप कार्याध्यक्ष श्री आलोक कुमार ने वाल्मीकि समाज के युवकों को संबोधित करते हुए कहा कि वाल्मीकि समाज ने अतीत में अनेक कष्ट सहे। यहाँ तक कि मैला तक उठाना मंजूर किया, लेकिन सनातन धर्म का दामन नहीं छोड़ा। हिंदू धर्म की रक्षा सबसे अधिक वाल्मीकि समाज ही करता आया है। सामाजिक समरसता का काम सम्पूर्ण हिन्दू समाज को मिलकर करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में बन रहा श्रीराम मंदिर सामाजिक समरसता का प्रतीक है, जिसका शिलान्यास श्री कामेश्वर चौपाल ने किया था। हिन्दू समाज हमेशा से एक साथ रहा है तथा अनुसूचित जाति हिन्दू समाज का अनन्य भाग है। किसी भी षड्यंत्र से इसको अलग नहीं किया जा सकता, आज के दृश्य से यह और स्पष्ट हो गया। उन्होंने कहा कि गोहाना में निर्मित होने वाला यह सामाजिक समरसता भवन, देश का अनूठा भवन होगा, जिसके दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से लोग गोहाना आएँगे।

 ज्ञात हो कि आलोक कुमार एक धर्म जागरण कार्यक्रम को संबोधित करने के लिए बरोदा रोड स्थित भगवान वाल्मीकि आश्रम में आए थे।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में मंचासीन विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महासचिव डॉ सुरेंद्र कुमार जैन ने बाल्मीकि समाज को संबोधित करते हुए कहा कि विहिप डॉ भीमराव अंबेडकर के सपनों को पूरा कर रही है। डॉ अंबेडकर जी ने संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरु जी को कहा था कि यदि हिन्दू संत यह घोषित कर दें कि छुआछूत हिन्दू समाज का हिस्सा नहीं है, हिन्दू धर्म का हिस्सा नहीं है, तो समरस समाज की स्थापना की जा सकती है, छुआ-छूत मिट सकती है। विश्व हिंदू परिषद के 1969 में उडुपी के सम्मेलन में पूज्य संतों ने यही प्रस्ताव पारित किया था। “हिंदवः सोदरा सर्वे, न हिन्दू पतितो भवेत”। उसके बाद से विश्व हिंदू परिषद छुआछूत को पूर्ण रूपेण निर्मूल करने के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। डॉ जैन ने कहा कि जो छुआछूत को मानता है, वह हिन्दू कहलाने लायक नहीं है। हमारे तीर्थ क्षेत्र, हमारा कुम्भ स्नान कहीं भी इनमें अस्पृश्यता नहीं है। इसीलिए कुछ कारणों से यह पाप हमारे समाज में प्रवेश कर गया, जो समाप्त होकर रहेगा, क्योंकि जो प्रकृति के अनुकूल नहीं है, वो चीज टिक नहीं सकती। डॉ जैन ने जोर देकर कहा कि बाल्मीकि अछूत नहीं हैं। ये धर्मयोद्धा हैं। डॉ जैन ने प्रश्न उठाया कि मीम और भीम का नारा लगाने वाले, आज तक मेवात में क्यों नहीं गए, जहाँ हरिजनों पर वहाँ का मुस्लिम समाज बहुत अत्याचार करता है, उनकी बच्चियों से बलात्कार करता है। उन्होंने पुनः पूछा कि वे सीएए के विरोध में कैसे खड़े हो गए, क्योंकि सीएए का लाभ जिन पाकिस्तान से आए हिंदुओं को मिलने वाला है, उनमें से अधिकांश अनुसूचित जाति के ही हैं। मीम और भीम के नारे को डॉ भीमराव अम्बेडकर ने अपने जीवन काल में ही ठुकरा दिया था, आज इस सम्मेलन ने उनके उस अभिमत पर मोहर लगा दी है।

सभा की अध्यक्षता कर रहे पूर्व न्यायाधीश श्री पवन कुमार ने कहा कि अब यह क्रांति की लहर, गोहाना तक सीमित नहीं रहेगी, हम सम्पूर्ण हरियाणा में लोगों को भगवा पटका पहनाकर, उनका हिन्दू समाज के साथ सम्बन्ध और मजबूत करेंगे और अलगाव के षड्यंत्रों को समाप्त करेंगे। उसके पश्चात् 52 गाँव के 104 लोगों ने नीला पटका उतारकर भगवा पटका धारण किया और एक ही नारा एक ही नाम, जय बाल्मीकि जय श्री राम का गगनभेदी उद्घोष किया।

कार्यक्रम का वातावरण अत्यन्त उत्साहजनक था। बाल्मीकि समाज के लोग बहुत ही उत्साहित व आशान्वित थे, अतिथियों के व्यवहार व उद्घोष से।  बाल्मीकि समाज ने इन सब बातों को बहुत पसंद किया। यह एक अनुकरणीय प्रयास है, सम्पूर्ण देश के लिए। इस कार्यक्रम के सहारे, हिन्दू समाज की रक्षा के लिए एकजुट हुआ सम्पूर्ण बाल्मीकि समाज। इतिहास साक्षी है कि विभाजनकारी षड़यंत्र सदा पराजित हुए  हैं और आपसी प्रेम व भाईचारा जीता है। अभी तो यह शुरूआत है….. ।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राजेश कुमार, सामाजिक समरसता मंच के विभाग प्रमुख महेंद्र कंसल व विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री श्री प्रेम प्रकाश भी मंच पर उपस्थित रहे। इस अवसर पर कार्यक्रम में श्री वाल्मीकि महासभा के महासचिव प्राण रत्नाकर, जींद से पार्षद भारत भूषण टांक, बसंत बहोत, रामू रामपाल, अनिल चावला, रमेश देहराज, अश्वनी कांगड़ा, हरीश कुमार, प्रवीण वैद्य,  दीपक चांग, अजीत सिंह नंबरदार मुख्य रूप से उपस्थित थे।

मुरारी शरण शुक्ल


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