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वनस्पति आधारित भोजन सर्वश्रेष्ठ “हेल्दी वेट लॉस” विषय पर विशेषज्ञों के विचार – कमल जैन

JITO (जीतो) व्यवसायियों, उद्योगपतियों, बुद्धिजीवियों और प्रोफेशनल्स का एक एक विश्वव्यापी सामाजिक संगठन है,  जो सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण, मूल्य आधारित शिक्षा, ज्ञान, सामुदायिक कल्याण, करुणा , वैश्विक मित्रता और आध्यात्मिक उत्थान के क्षेत्र में लगातार कार्यरत है। कोरोना की विषम परिस्थितियों में स्वास्थ्य को लेकर खान पान पर भी चर्चाएं हैं । हाल ही में पूर्वी दिल्ली JITO (जीतो) के ईस्ट दिल्ली लेडीज विंग द्वारा “हेल्दी वेट लॉस” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया। सेमिनार में विशेषज्ञों डॉ. सौरभ जिंदल और डॉ. शिफाली दादू द्वारा ऑनलाइन परिचर्चा हुई जिसमें आयोजकों कनक सुराना, अंजू सेठिया, प्रिया जैन, अंजली जैन, पारसमल जैन, शैलेंद्र सुराना, तरुण जैन के साथ साथ 100 से अधिक लोगों ने भाग लिया। सेमिनार में बताया गया कि जैन – (शाकाहारी और वीगन) भोजन श्रेष्ठ है, और उसमें भी एक नियमित खान पान चर्या का  पालन करने से मोटापा तो कम होता ही है साथ ही साथ यह बीमारियों से बचने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और स्वस्थ जीवन हेतु भी अत्यंत उपयोगी है। इस परिचर्चा के कुछ सारगर्भित सुझाव बिंदु इस प्रकार हैं :

  1. वजन बढ़ना शरीर की प्रणालियों को प्रभावित करने वाले विकारों का संकेत हो सकता है; वजन घटाने के साथ साथ अच्छे स्वास्थ, अच्छी रोग प्रतिरोधक शक्ति हेतु जैन – (शाकाहारी और वीगन) भोजन,  मांसाहारी आहार, से बेहतर है, और वनस्पति आधारित भोजन ही सर्वश्रेष्ठ है;
  2. वसा नहीं बल्कि कार्बोहाइड्रेट वजन और बीमारियां बढ़ाते हैं और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट अधिक हानिकारक है; कुल मिलाकर कम कैलोरी का सेवन ही लाभकारी है;
  3. आहार में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ाएं ; दाल, बीन्स, हरी सब्जियां, ब्रोकोली का सेवन लाभकारी है;
  4. प्रोटीन हेतु भी शाकाहारी प्रोटीन आहार ही बेहतर है; रिफाइंड प्रोटीन (प्रोटीन पाउडर) हानिकारक है; मांसाहार में और पशु प्रोटीन में कई हानिकारक तत्व जैसे ऑक्सीटोसिन आदि होते हैं, जो कई बीमारियों का कारण बनते हैं;
  5. गेहूं को कम करें, मल्टीग्रेन अच्छा विकल्प है (रागी, ज्वार, बाजरा, बेसन, जई और मक्का)। साधारण चावल के स्थान पर ब्राउन चावल का उपयोग बढ़ाएं । क्विनोआ, ओट्स, रवा, खाने के लिए अच्छे विकल्प हैं;
  6. फल की तुलना में सब्जियां अधिक स्वस्थ होती हैं; सलाद अच्छा विकल्प है; आलू से बचें;
  7. नमकीन और जंक खाने से दूर रहें : भुना हुआ मखाना, मूंगफली, भुना हुआ मटर (काला चना), बीन्स, पनीर अच्छे विकल्प हैं.
  8. मीठे फलों (जैसे तरबूज, अंगूर, आम, केला) से परहेज करें; ये शक्कर के पानी की तरह हैं; अमरूद, नाशपाती, सेब, जामुन जैसे कम चीनी के फल बेहतर विकल्प हैं;
  9. फलों के रस से परहेज करें; ये तो और भी अधिक हानिकारक हैं, क्योंकि ये बिना फाइबर के हैं; इसलिए यदि आवश्यक हो, तो इसके कच्चे फलों को सीमित मात्रा में लें;
  10.  काजू, किशमिश जैसे सूखे मेवों से बचें; बादाम, अखरोट, मखाने जैसे सूखे मेवों का चयन बेहतर विकल्प है
  11.  बेकरी आइटम से बचें : कॉर्नफ्लेक्स, गुड़, शहद, , ब्रेड, बिस्कुट, मैदा, पिज्जा, बर्गर, सैंडविच आदि न लें
  12.  दूध से परहेज करें; दही और पनीर बेहतर विकल्प हैं

 

खाने की आदतें:

  • नाश्ता छोड़, सुबह का भोजन भरपेट लेना और शाम का भोजन जल्दी लेना (कई जैन सूर्यास्त से पहले लेते हैं), आंतरायिक उपवास (भोजन के बीच अंतर) का एक बहुत अच्छा तरीका है ; इसमें 16 घंटे का जो अंतराल होता है वह बहुत स्वास्थोपयोगी । जैनों में परंपरागत भी कई लोग इसका पालन करते हैं।  यदि बीच में आवश्यक हो, तो बिना चीनी और बिना दूध (या कम से कम दूध) के ग्रीन टी, ब्लैक कॉफी लें।
  • जैन कहते हैं, बार बार मुंह नहीं झुठलाइए : बार-बार खाने से शरीर को बार-बार इंसुलिन स्रावित करने की आदत हो जाती है।  इसलिए आहार के अंतराल में कोई चॉकलेट, कोई चाय, कुछ भी नहीं लें, यदि आवश्यक हो तो ग्रीन टी, ब्लैक कॉफी लें।
  • आहार समय सारणी ठीक करें और भोजन निश्चित समय से लेने का प्रयास करें, ताकि शरीर को निश्चित अंतराल पर ही इंसुलिन स्रावित करने की आदत हो।
  • कुछ दिनों के लिए उपवास और एक सख्त समय सारणी का पालन करना, फिर अन्य दिनों में अक्सर, बार बार, कुछ कुछ, खाना खाने से शरीर भ्रमित हो सकता है और यह मददगार नहीं हो सकता।

सेमिनार के उपरांत इस विषय को अत्यंत उपयोगी और सामयिक बताते हुए आचार्य ज्ञानसागर इंटरफैथ फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक सीए आदीश कुमार जैन (पूर्व निदेशक कॉरपोरेशन बैंक) ने कहा कि कोरोना की विषम परिस्थिति से खान पान पर एक पुनर्चिंतन आरंभ हो चुका है, उन्होंने कहा कि अच्छे स्वास्थ के लिए, पारंपरिक खान पान के महत्व को लोग समझ रहे हैं, उन्होंने बताया कि रोगों से लड़ने के लिए, और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय भी शाकाहारी घरेलू रसोई की सामग्री जैसे कालीमिर्च, अजवाईन, लोंग, सेंधा नमक, हल्दी, जीरा, धनिया, तुलसी, दालचीनी, कालीमिर्च, सूखी अदरक, और मुनक्का, काली इलायची, हर्बल चाय / काढ़े को उपयोगी बता रहा है। आचार्य ज्ञानसागर इंटरफैथ फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक स्वराज जैन (टाइम्स) ने इस विषय में बताया कि एनिमल वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉक्टर डी. सी. जैन (पूर्व स्वास्थ्य सलाहकार, भारत सरकार) ने इस विषय में काफी शोध किए और करवाए हैं और शाकाहार, व्रत और आहार चर्या के महत्व को वैज्ञानिक तथ्यों से परखा और सत्य साबित किया है।

खान पान के आचार विचार आदतों के वशीभूत होते हैं। मोटापा कम करने के लिए, साथ ही साथ बीमारियों से बचने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और स्वस्थ जीवन हेतु, अच्छी आहार चर्या को एक स्थायी आदत बनाएं और बच्चों में शुरू से ही खान पान की अच्छी आदतें डालें।

लेखिका : श्रीमती कमल जैन ,जीतो लेडीज विंग ईस्ट दिल्ली की सदस्य है। 

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