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 रक्षा के क्षेत्र में भारत की एक और नयी उपलब्धि: हाइपरसोनिक व्हीकल का परीक्षण सफल

स्‍वदेश में पूरी तरह निर्मित हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी डिमोन्‍स्‍ट्रेटर व्‍हीकल (एच.एस.टी.डी.वि) का सोमवार को सफल परीक्षण किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह देश के भविष्‍य के मिसाइल सिस्‍टम और एरियल प्‍लेटफॉर्म के लिहाज से महत्‍वपूर्ण साबित होगा हाइपरसोनिक प्रोपल्शन तकनीक पर आधारित (एच एस टी डी वि) का डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन यानी (DRDO ) ने विकसित किया है। डी आर डी ओ के इस उपलब्धि पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई दी।यह देश के अहम उपलब्धियों में से एक है।

हाइपरसोनिक क्रूज वाहन को एक ठोस रॉकेट मोटर का उपयोग करके प्रक्षेपित किया गया जो इसे 30 किलोमीटर (किमी) की ऊंचाई तक ले गया, जहां हाइपरसोनिक गति के अनुरूप इसके वायुगतिकीय ताप कवच को अलग किया गया। इसके बाद क्रूज़ वाहन प्रक्षेपण यान से अलग हो गया और इसके हवा को ग्रहण करने वाले हिस्से येाजना के अनुसार खुल गए। इस दौरान ईंधन के रूप में हाइपरसोनिक दहन की प्रक्रिया निरंतर जारी रही जिससे यह अपने वांछित उड़ान पथ पर ध्वनि की गति से छह गुना यानी 2 किलोमीटर प्रति सेंकेंड की गति से 20 सेकेंड से ज्यादा तक चलता रहा।इस दौरान ईंधन इंजेक्शन और स्क्रैमजेट के ऑटो इग्निशन जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं ने तकनीकी परिपक्वता का प्रदर्शन किया। स्क्रैमजेट इंजन ने टेक्स्ट बुक तरीके से प्रदर्शन किया।

रक्षा मंत्री द्वारा ट्वीट में लिखा है की, ‘मैं डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को प्रधानमंत्रीजी के आत्‍मनिर्भर भारत की दिेशा में हासिल की गई महत्‍वपपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं। मेरी इस पप्रोजेक्ट्स से जुड़े वैज्ञानिकों से बात हुई है और मैंने इस बड़ी उपलब्धि पर उन्‍हें बधाई दी है.भारत को उन पर गर्व है।’

डीआरडीओ के अधिकारी का कहना है की, (एच एस टी डी वि) की इस सफल उड़ान के साथ भारत ने एक अत्‍यधिक जटिल टेक्‍नोलॉजी के ज़रिये अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। यह आने वाले समय में घरेलू रक्षा उद्योग के साथ आने वाली पीढ़ी के लिएअहम साबित होगी।

एच.एस.डी.टी.वि, स्क्रैमजेट इंजिन से संचालित होता है और यह 6 मैक की गति हासिल कर सकता है। जो की रैमजेट से काफी बेहतर है।

इस नयी उपलब्धि के लिए भारत के प्रधानमंत्री ने भी अपनी बधाई व्यक्त की।  इसमें कोई दो राय नहीं की यह एक अहम उपलब्धि है और इस सफल परिक्षण से भारत को काफी लाभ होगा।

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