विचार

युवाओं में मानसिक अवसाद की अधिकता का क्या कारण -डॉ. अरविन्द प्रेमचंद

वर्तमान में युवा वर्ग शिक्षित जरूर हुए पर व्यवहारिक जीवन से अनभिज्ञ होने से छोटी छोटी बातों से हताशा का सामना करने में असमर्थ होने से ऐसे कदम उठा लेते हैं जिसका कोई प्रतिफल नहीं मिलता और वे अपने जीवन की ईहलीला समाप्त कर लेते हैं। हर व्यक्ति की अनंत इच्छाएं होती हैं और उन सबक पूर्ती होना संभव नहीं हैं। कारण विश्व एक निश्चित परिमिति हैं और हर व्यक्ति पूरा विश्व अपना बनाना चाहता हैं। सबको सब कुछ नहीं मिलता। सबको अपने पुण्य पाप का फल मिलता हैं। आम के पेड़ में फल एक निश्चित समय पर आते हैं और कुछ पेड़ की डाली में पकते हैं और कुछ को पालां में पकाते हैं। कोई फल किसी धनवान को जाता हैं तो कोई फल किसी गरीब की झोली में जाते हैं।।

हर मनुष्य पराधीन हैं और इच्छाएं अनंत होने से वह दुखी होता या रहता हैं ,,सबको सब कुछ नहीं मिलता हैं। मात्र २० वर्षीय युवती ने इस बात पर आत्महत्या कर ली कि उसे कोई नहीं चाहता ! इसी प्रकार कि घटना लगभग २ वर्ष पहले हुई थी कि एक लड़की का कोई बॉय फ्रेंड न होने से ,कारण उसके हॉस्टल कि सब लड़कियां दो दो दिन अपने अपने बॉय फ्रेंड्स के साथ हॉस्टल से गायब रहती थी ,इसका कोई बॉय फ्रेंड न होने से उसने भी आत्महत्या कर ली थी। या किस मानसिकता का ञोतक हैं। परीक्षा में नंबर कम आना ,मन माफिक वस्तु न मिलना ,कोई नौकरी न मिलना ,नौकरी मिली तो उसका तनाव ,वर्तमान में बड़े बड़े व्यापारी जिनका व्यापार फ़ैल हुआ ,गरीबी के कारण आत्महत्या बहुत सरल सुगम मार्ग निकल पड़ा हैं।

एक ने ठीक लिखा हैं कि यदि तुममे आत्महत्या का विचार आये तो अपने आस पास के लोगों को देखो या अपने मित्रों को देखो ,कि तुम उनसे अच्छे हो। अधिकांश ये प्रकरण जो युवा लोग पढ़ने ,नौकरी करने घर से बाहर अन्य शहरों या जगह जाते हैं ,उनको कोई दोस्त या सहयोगी नहीं मिलता या प्रतिस्पर्धा के कारण चिंताग्रस्त होकर अवसाद में आकर ये कदम उठाते हैं। वे इस दौरान मन की बात या भड़ांस नहीं निकाल पाते और अंदर ही अंदर घुटते हैं और इस प्रकार का कदम उठाते हैं। यह एक दिन की आकस्मिक क्रिया नहीं होती । जब सब तरफ से निराशा हाथ आती हैं तब यह कदम उठाते हैं। इसी क्षण कोई सहारा या अपनेपन की जरुरत होती हैं।

हमेशा अपने सपने बहुत बड़े मत देखो। कल्पना लोक या स्वप्न लोक की दुनिया अलग होती हैं ,उसी प्रकार सिनेमा या सीरियल की कहानी अलग होती हैं पर हम उसी में जीने लगते हैं । आजकल जो युवा या कोई भी हो जो आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं वे जीवन से पलायन करते हैं जबकि जीवन संघर्षमय होता हैं। कुछ क्षण का उठाया गया कदम जिंदगी भर के लिए दुखदायी होता हैं।

आजकल सामाजिक धार्मिक सरोकारों से दूर रहने के कारण कल्पनालोक में रहने से ख़यालीपुलाव पकाते हैं और अंत में दुखी होते हैं। धर्म से हमको जीवन की वास्तविकता सीखने मिलती हैं ,युवा अवस्था में जोश में होश नहीं खोना चाहिए। इतनी जल्दी निराशा हताशा से आप जीवन का कैसे सामना करेंगे। यह बुजदिली हैं। यह स्वीकार्य नहीं हैं। हर व्यक्ति अपने आप में सुन्दर होता हैं ,सुंदरता मन की अधिक जरूरी हैं ,बाह्य सुंदरता तो घटती बढ़ती रहती हैं । हमारी आत्मा तो अजर अमर हैं। हमेशा सकारात्मक सोच पैदा करो और भविष्य के प्रति आशावादी रहे ,यह समय भी बीत जायेगा। दिन के बाद रात आती ही हैं ,ये सब दिन सबके समान नहीं होते। कोई भी व्यक्ति पैदा नहीं हुआ हैं जिसको संघर्ष नहीं करना पड़ा हो ,आज अच्छे अच्छे महाराजा सत्ता पाने जनता के बीच वोट के खातिर भीख मांगते दिखाई देते हैं ,वे दया के पात्र हैं क्योकि वे आपने को याद नहीं रखते। द-या, या –द।

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