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मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का तुरंत इस्तीफा लिया जाए- कांग्रेस

नई दिल्ली, 24 जून: कांग्रेस पार्टी ने मणिपुर हिंसा के 52 दिन बाद बुलाई गई सर्वदलीय बैठक को सिर्फ औपचारिकता बताया है। कांग्रेस ने कहा कि सरकार द्वारा यह बैठक सिर्फ समाचारों की हेडलाइन बनाने के लिए रखी गई थी। कांग्रेस पार्टी की तरफ से सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए मणिपुर के सीएलपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह को तीन घंटे की बैठक में सिर्फ सात मिनट बोलने का समय दिया गया, जो मणिपुर का अपमान है। कांग्रेस पार्टी ने कहा कि एन बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री रहते मणिपुर में शांति की कोई संभावना नहीं है, इसलिए एन बीरेन सिंह का तुरंत इस्तीफा लिया जाए। प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर हिंसा को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ें।

ये बातें सर्वदलीय बैठक के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मुख्यालय में मणिपुर के सीएलपी नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह और कांग्रेस महासचिव एवं संचार, प्रचार व मीडिया विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहीं। 

जयराम रमेश ने कहा कि 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी जी के प्रधानमंत्री रहते मणिपुर में हिंसा हुई थी। इसके बाद मणिपुर शांति, अमन, सद्भावना और विकास के रास्ते पर लौटा। इसका कारण इबोबी सिंह हैं, जिन्होंने 15 साल तक मणिपुर में स्थिर सरकार दी। मगर आज हुई सर्वदलीय बैठक में उन्हें तीन घंटे में से सिर्फ सात मिनट तक का समय दिया गया, जो मणिपुर का अपमान है। 

वहीं मणिपुर के सीएलपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने प्रेस वार्ता में कहा कि उन्होंने सर्वदलीय बैठक में कुछ बातें रखी हैं। इस सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री मोदी को करनी चाहिए थी, जिन्होंने पिछले 50 दिनों में मणिपुर हिंसा पर एक भी शब्द नहीं बोला है। कांग्रेस पार्टी की मांग है कि प्रधानमंत्री मणिपुर हिंसा को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ें। यदि यह सर्वदलीय बैठक प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में इंफाल में आयोजित होती तो बेहतर होता। इससे मणिपुर के लोगों को स्पष्ट संदेश जाता कि मणिपुर की जो पीड़ा है, वह देश की पीड़ा है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि उग्रवादी समूहों के पास जो हथियार हैं, वह हथियार बिना किसी समझौते के तुरंत छीने जाएं। 

इबोबी सिंह ने मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का तुरंत प्रभाव से इस्तीफा मांगते हुए कहा कि जब तक एन बीरेन सिंह मुख्यमंत्री रहेंगे, तब तक मणिपुर में शांति की कोई संभावना नहीं है। मुख्यमंत्री ने खुद स्वीकार किया है कि वह स्थिति को संभालने में नाकाम रहे। उन्होंने इसके लिए जनता से माफी भी मांगी है। 11 मार्च, 2023 को मुख्यमंत्री ने सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन के समझौते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जबकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुख्यमंत्री के इस बयान का खंडन किया था। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का मुख्यमंत्री रहना जनता के हित में नहीं है। प्रधानमंत्री तुरंत मुख्यमंत्री का इस्तीफा लें। उन्होंने कहा कि मणिपुर का नक्शा बदला नहीं जाए, इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता। इसके साथ ही अलग-अलग समुदाय की मांगों को संवेदनशीलता से सुना जाए और आम सहमति बनाने का प्रयास हो। 

पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने कहा कि मणिपुर के दो राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हैं। केंद्र सरकार द्वारा तत्काल इन दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों को खुलवाया जाए। इन राष्ट्रीय राजमार्ग से लोगों और जरूरी वस्तुओं का आवागमन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि मणिपुर के 50 हजार लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं और लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं। प्रभावित लोगों के लिए घोषित मुआवजा अपर्याप्त है। प्रभावित लोगों के पुनर्वास, राहत और आजीविका के लिए मुआवजे की घोषणा हो।


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