Uttar Pradesh

नौएडा एन्ट्रेप्रिनियोर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्राधिकरणों के अधिकारियों द्वारा उद्योगों के प्रति नकारात्मक रवैया से अवगत कराया

नौएडा एन्ट्रेप्रिनियोर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल जिसमे एन.ई.ए अध्यक्ष विपिन मल्हन एवं महासचिव वि.के सेठ ने मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से दिनांक 12 सितंबर 2022 को ग्रेटर नोएडा स्थित जी बी विश्विद्यालय में मुलाकात की। आप को बता दे की मा0 मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, दिनांक 12 सितंबर 2022 को ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन वर्ल्ड डेयरी समिट (IDF WDS) 2022 के कार्यक्रम आये थे।

एन.ई.ए अध्यक्ष विपिन मल्हन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा उद्योगों के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाये जाने पर मुख्यमंत्री जी पर कार्यवाही करने की मांग की है. प्रा0लि0 कम्पनी में शेयर होल्डिंग बदलने पर प्राधिकरण द्वारा लिया जाने वाला चार्ज एवं स्टांप विभाग द्वारा लिया जाने वाला चार्ज जैसे अनेको गंभीर विषयो पर मा0 मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को अवगत करवाया है।

एन.ई.ए द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी दिए पत्र –

नौएडा एन्ट्रेप्रिनियोर्स एसोसिएशन का गठन 1978 में हुआ तब से आज तक विगत 44 वर्षो में इस संस्था ने उद्योगों के विकास में अपनी बहुत सकारात्मक भूमिका निभाई है । मान्यवर हम आपको अवगत कराना चाहते हैं कि विगत कुछ वर्षो से भारतीय जनता पार्टी सरकार की यहा के उद्योगों के प्रति हुत सकारात्मक सोच रही है परन्तु साथ ही बडा आश्चर्य होता है कि अधिकारियों द्वारा जो नीति बनाई जाती है उसमें उद्योगों के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाया जा रहा है। आज अगर कोई प्रा0लि0 कम्पनी में अगर 1% की भी शेयर होल्डिंग बदलनी हो तो नौएडा प्राधिकरण उसके चार्ज लेता है और स्टांप विभाग भी चार्ज लेता है प्रा0लि0 कम्पनी अपने आप में एक पहचान होती है। महोदय भारत सरकार के कम्पनी निगमित मामलों के नियमों के अनुसार भी यदि किसी कम्पनी के शेयर होल्डर बदलते है तब भी उस कम्पनी की संरचना पर कोई असर नही होता है, कम्पनी एक ही बार बनाई जाती है जिसमें आवश्यकतानुसार शेयर होल्डर्स बदलते रहते हैं । कृप्या इस मामले को संज्ञान में लेकर उचित निर्णय लेने की कृपा करें ।

आश्चर्य वाली बात है कि आज नौएडा, गे्रटर नौएडा ,यमुना प्राधिकरण में अगर किसी को अपना उद्योग लगाना है तो इन प्राधिकरणों द्वारा जो सम्पत्तियां लीज पर दी जाती है उस पर बोली लगाने का प्रावधान कर दिया गया है ऐसा लगता नही इन अधिकारियों द्वारा यहा पर उद्योग लगवाया जा रहा है ऐसा लगता है इन अधिकारियों द्वारा ऐसा निर्णय पास करके शायद भूमि से पैसा कमाने की इच्छा हो गई है।

कहीं पर भी उद्योग लगाने के लिए हमेशा सरकार ऐसी जमीन देती है जहा पर कम से कम पैसा जमीन पर लगे और उद्योगपति का ध्यान अपनी पूजीं का निवेश उद्योग चलाने पर करे। यदि सारा पैसा ही जमीन पर लग जाएगा तो उद्योग क्या चलायेगा । हमारा निवेदन है इस पर विचार विमर्श किया जाए।

महोदय, नौएडा प्राधिकरण की जितनी सम्पत्ति है वे सब लीज पर है हम अगर प्राधिकरण से उद्योगो के लिए जमीन लेते हैं उसका 90 वर्ष तक की लीज देते है चाहे वन टाईम लीज रेंट के रूप में दें चाहे प्रत्येक वर्ष दें । किसी कारण से अगर हम चलाने में असफल हो जाए तो हम उस बिल्डिंग /भूखंड को किराये पर देकर अपनी जिविका चलाते है । महोदय आपको आश्चर्य होगा कि नौएडा प्राधिकरण द्वारा यदि हमें अपने औद्यौगिक परिसर पर किरायेदार रखते हैं उस पर भी प्राधिकरण द्वारा निर्मित क्षेत्र फल पर ३०० वर्ग मीटर के रेंट परमिशन चार्ज की गणना पर किराया अनुबंध लेना शुरू कर दिया है। औद्यौगिक भूखंड का हम लीज रेंट भी दें और उसके बाद हम किसी को किराये पर रखतें है उसके लिए भी उसके चार्जेज प्राधिकरण को दें यह सकारात्मक रवैया नजर नही आता कृप्या इस पर विचार करें ।

मान्यवर, जब किसी औद्यौगिक क्षेत्र में औद्यौगिक संगठन बने हुए होते हैं तो कोई भी प्राधिकरण कोई भी नीति लेकर आता है उससे पहले जो यहा पर औद्यौगिक संगठन है उनके साथ बैठक कर विचार विमर्श कर लिया जाए ताकि ये नीतियां भविष्य में उद्योगों के लिए ठीक रहेंगी या नही उसके बारे में चर्चा कर ली जाए । बंद कमरे में बैठक कर यदि अधिकारी कुछ भी अपने विवेक से नीति बनाकर पास कर देगें और भविष्य में उन नीतियों से उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। यदि अधिकारियों द्वारा उद्योगों से संबधित नीति बनाने हेतु औद्यौगिक संगठनों से विचार-विमर्श नही किया जाता तो किसी संगठन के रूप स्वरूप की कोई जरूरत ही नही रह जाती कृप्या इस पर भी अपना मार्गदर्शन देने की कृपा करें ।

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