HEALTH

तनाव प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य

तनाव यानी स्ट्रेस होता क्या है,यह डॉ अर्चना शर्मा जो की एक नैदानिक ​​मनोचिकित्सक हैं उन्होंने बहुत ही तरीके से समझाया की आखिर स्ट्रेस है क्या और इसकी वजह क्या है ,स्ट्रेस या तनाव यह तब होता है जब हमारे दिमाग पर प्रेशर तो हो लेकिन उस प्रेशर को कम करने के लिए कोई सोर्स या कोई माध्यम न हो।

कई मामलो में यह जरुरी भी है क्यों ,क्यूंकि अगर तनाव न हो किसी काम को करने का प्रेशर न हो तो हम आलसी हो जाते है। और हम तनाव से जूझ रहे होते है और हमे मालूम भी नहीं होता ,जब हम छोटी छोटी बातों पर चिढ़ने लगते है ,झगडे करते है ,बेचैनी होती है या जब हम  बहुत ज़्यादा थकान महसूस करते हैं ,जब की हमने कुछ किया भी न हो, तब हम तनाव में होते हैं । 

तनाव हीं हमारे चिंता करने की वजह है और तनाव के वजह से हीं कई बार हम डिप्रेशन में चले जाते हैं।  आजकल के युथ में तनाव की सबसे बड़ी वजह है  उनका फ़ोन और कई बार सोशल मीडिया भी है ,और हम तब भी डिप्रेशन में जाते है जब कोई हमारा साथ नहीं देता और कोई हमें समझ नहीं सकता। लेकिन क्या हम किसी को पूरी तरह से समझ सकते है क्या यह मुमकिन है किसी को पूरी तरह से समझना ,छोटी छोटी बातों पर चिंता करना ,किसी से अपनी बातों को शेयर न करना हमे अंदर ही अंदर से तनाव से भर देता है। 

एक साइकिल जो चिंता करने वालों के लिए है वह है ,पहले हम चिंता करते हैं फिर हमे पैनिक अटैक भी आजाते है, फिर हम दूसरे अटैक की चिंता करने लग जाते हैं ,फिर और चिंता और फिर एक अटैक फिर और भी ज़्यादा डर और फिर चिंता बस फिर इसी तरह से यह साइकिल जारी रहके हमें डिप्रेशन में ले जाता है। कई बार हम अपने दोस्तों को बतातें हैं और घरवालों को भी लेकिन उनका कहना यह होता है की यह छोटी मोटी बातें हैं सबको होती हैं,और ज़्यादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं है ,कोई  हमें डरा भी देते हैं की पैनिक अटैक हार्ट अटैक में भी बदल सकता है लेकिन यह सिर्फ वहम है क्यूंकि  चिंता और तनाव कभी जान नहीं लेते हैं। 

अब इसे दूर कैसे करते हैं,सबसे पहली बात जो हमने सीखी और जानी वह यह थी की,” इट इज़ नॉट दी स्ट्रेस दैट किल्स , इट इज़ आवर रिएक्शन ओवर इट”,जो चीज़े हमारी बस में होती हैं हम उसे तो कंट्रोल  कर हीं  सकते हैं  जैसे हमारे शब्द, हमारे कार्य ,हमारी सोच और हमारा व्यवहार। 

जो हमारे बस में नहीं हैं उन्हें हम रोक भी नहीं सकते और सबसे बड़ी चीज़ की हमें उसपे ध्यान नहीं देना चाहिए ,जैसे दूसरों की सोच, उनके शब्द, उनकी बातें और उनके व्यवहार ,उनकी गलती।  कभी कभी हम उनकी गलतियों  की वजह से खुद को दुखी करते हैं डिप्रेस हो जाते हैं ,जो की गलत है। 

टाइम मैनेजमेंट: समय का सही उपयोग करने से भी, स्ट्रेस से  पीछा छुड़ा सकते हैं , क्यों न हम ऐसे टाइम मैनेज करें की कुछ घंटे  हमें चिंता करना हो ,ऐसा करने से भूल जायेंगे की हमे सोचना कब था । 

लक्ष्यों का निर्धारण यानि गोल सेट करना अपने टाइम को ऐसे सेट करें की हमें एक कार्य को पूरा करना है तो वह पूरा घंटा सिर्फ उसी कार्य को दें। पेरफ़ेक्शनिज़्म को अवॉयड करें।

रेफ्रेमिंग,अपनी नेगेटिव थिंकिंग को चैलेंज करना और पॉजिटिव सेल्फ टॉक और बिहेवियरल स्ट्रेटेजीज से हम स्ट्रेस को कम कर सकते हैं। फिजिकल एक्सरसाइज ,ब्रीथिंग ,स्माइल एंड लाफ रिलैक्सेशन जैसे उपाईयों से हम तनाव डिप्रेशन और अपने मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रख सकतें हैं।

खाने का भी इसमें बहुत महत्व है ,समय पर खाना ,समय पर सोना,इसका मतलब है पूरी नींद लेना रोज़ हीं ,जैसे दिन ४ या ५ घंटे एक्स्ट्रा सो जाते हैं यह भी बहुत गलत है एक या दो घंटे एक्स्ट्रा सोने में कोई बुराई नहीं लेकिन, चार और पांच घंटे हमारे शरीर को कमज़ोर बना देते हैं और स्ट्रेस का कारण बनते हैं। अगर हम समय पर खाएं और अच्छा खाएं तो भी फर्क पड़ता है जैसे विटामिन बी १२ और विटामिन डी की कमी भी एक वजह है डिप्रेशन की क्यूंकि यह दोनों स्ट्रेस पैदा करने वाले होर्मोनेस को मारतें हैं। साथ हीं साथ जो लोग डिप्रेशन के शिकार होते हैं वह ज्यादा से ज्यादा चॉकलेट और कोल्ड्रिंक खाते हैं , क्यूंकि कैफीन और ग्लूकोज़ जो की इनमे मौजूद होते है वह ताकत देते हैं।

और जो कुछ लोग ड्रग्स अल्कोहल और सेल्फ मेडिकेशन लेते हैं वह खुद को बीमार करते हैं ,क्यूंकि यह सिर्फ और सिर्फ कुछ समय के लिए आपको स्ट्रेस से दूर कर सकते हैं। और अगर हम स्ट्रेस से पहले ही लड़ ले उसे सही समय पर खत्म कर दें तो शायद दवाइयों की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

कोरोना जैसी महामारी के बिच हम अपनों से मिल भी नहीं सकते, इसलिए इस वक़्त हमे खुद को समझकर काम करना होगा।  क्यूंकि इस वक़्त स्ट्रेस के काफी वजह है, लेकिन उन्हें कंट्रोल करने के भी काफी तरीके हैं ।

 

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