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जानिए क्या है – रेड जोन, ग्रीन जोन, ऑरेंज जोन और कंटेनमेंट जोन

गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन को 4 मई, 2020 से दो सप्ताह और बढ़ाने के लिए आज आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत एक आदेश जारी किया। इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने इस अवधि में विभिन्न गतिविधियों या कार्यों के विनियमन के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए, जो देश के जिलों के रेड (हॉटस्पॉट), ग्रीन और ऑरेंज जोन में बदलने के जोखिम पर आधारित हैं। इन दिशा-निर्देशों में ग्रीन और ऑरेंज जोन में पड़ने वाले जिलों में काफी रियायतें या ढील दी गई है।

ग्रीन जोन ऐसे जिले होंगे ज‍हां या तो अब तक संक्रमण का कोई भी पुष्ट (कन्‍फर्म) मामला नहीं आया है अथवा पिछले 21 दिनों में कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है।

रेड जोन के रूप में जिलों का वर्गीकरण करते समय सक्रिय मामलों की कुल संख्या, कन्‍फर्म मामले दोगुनी होने की दर, जिलों से प्राप्‍त कुल परीक्षण (टेस्टिंग) और निगरानी सुविधा संबंधी जानकारियों को ध्यान में रखा जाएगा।

ऑरेंज जोन वे जिले, जिन्हें न तो रेड जोन और न ही ग्रीन जोन के रूप में परिभाषित किया गया है, उन्‍हें ऑरेंज जोन के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन  में जिलों के वर्गीकरण को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ हर सप्‍ताह या आवश्यकतानुसार पहले साझा किया जाएगा। वैसे तो राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश कुछ और जिलों को रेड व ऑरेंज जोन के रूप में शामिल कर सकते हैं, लेकिन वे किसी ऐसे जिले के वर्गीकरण को घटा नहीं सकते हैं जिसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा रेड या ऑरेंज जोन की सूची में शामिल किया गया है।

नियंत्रण क्षेत्र/कंटेनमेंट जोन कोविड-19 के फैलाव और रेड एवं ऑरेंज जोन के अंतर्गत आने की दृष्टि से देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों को नियंत्रण क्षेत्र (कंटेनमेंट जोन) के रूप में निर्दिष्‍ट किया गया है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां संक्रमण फैलने का व्‍यापक जोखिम है।

कंटेनमेंट जोन को संबंधित जिला प्रशासन द्वारा परिभाषित किया जाएगा और ऐसा करते समय सक्रिय मामलों की कुल संख्या, उनके भौगोलिक फैलाव और कार्यान्‍वयन की दृष्टि से सुव्‍यवस्थित सीमांकन करने की आवश्यकता को ध्यान में रखा जाएगा।

कंटेनमेंट जोन के निवासियों के बीच “आरोग्य सेतु ” एप  डाऊनलोड अनिवार्य है तथा इसकी  100% कवरेज स्थानीय प्राधिकारी सुनिश्चित करेगा। कंटेनमेंट जोन के लिए गहन निगरानी प्रोटोकॉल होंगे जिनमें मरीज के संपर्क में आए लोगों का पता लगाना, घर-घर की निगरानी, किसी व्‍यक्ति से जुड़े जोखिम के आकलन के आधार पर उसका होम/संस्थागत क्‍वारंटाइन और नैदानिक प्रबंधन भी शामिल हैं।

कंटेनमेंट जोन मे सख्त दायरा नियंत्रण करने की आवश्यकता होगी, ताकि आपातकालीन चिकित्सा स्थिति और आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति बनाए रखने को छोड़कर इस जोन के भीतर और बाहर लोगों की आवाजाही न हो सके। कंटेनमेंट जोन के भीतर किसी भी अन्य गतिविधि या कार्य की अनुमति नहीं है।

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