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गुरु की आज्ञा मानने वाला ही सच्चा शिष्य : मुनिश्री प्रसाद सागर जी

मुंगावली: गुरु की आज्ञा का पालन जो करता है और जो उनकी हर बात को मानता है वही सच्चा शिष्य कहलाता है क्योंकि यह परंपरा केवल भारत है और कहीं देखने को नहीं मिलेगी। साल में 12 पूर्णिमा आती है मगर यही पूर्णिमा को ही हम गुरु पूर्णिमा क्यों कहते है और मनाते हैं। इसकी भी खास वजह है क्योंकि आज के दिन भगवान महावीर को शिष्य मिले थे वही शिक्षा तो हर कोई दे सकता है मगर दीक्षा गुरु ही दे सकता है जिस तरह माँ को पूर्ण कहा गया है उसी तरह यह गुरु पूर्णिमा है इसलिए हम सभी को अपने जीवन मे एक गुरु जरूर बनाना चाहिए। उक्त उदगार नगर में विराजमान पूज्य मुनिश्री प्रसाद सागर जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सुधासागर भवन में धर्म सभा मे कहे। उन्होंने कहा कि यदि पेड़ अच्छा हो तो फल अच्छे होते हैं। दूध अच्छा हो तो मिठाई अच्छी होती है उसी तरह गुरु भी अच्छा होना चाहिए जो अपने जीवन को अच्छा बना सके।
मुनि श्री निकलंक सागर जी महाराज ने कहा कि हम लोग सिरोंज से विहार करते हुए खुरई पहुंचे। हम लोगों को भी पता नहीं था कि हमारा चातुर्मास कहा होना है मगर आप लोगों का पुण्य इतना तेज था कि गुरुवर विद्यासागर जी महाराज ने हमें आपके नगर चातुर्मास करने को कहा। आप लोगों पर गुरु का विश्वास था इसलिए आपको यह सौभाग्य मिला नहीं तो यहां आसपास ओर भी जगह थी ओर कहीं भी चातुर्मास हो सकता है इसलिए सभी को सावधानी पूर्वक चातुर्मास कराना है।


भक्तो ने सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए घर-घर मनाई गुरु पूर्णिमा भक्ति भाव से मनी गुरु पूर्णिमा

नगर में विराजमान पूज्य मुनिश्री प्रसाद सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में गुरु पूर्णिमा बड़े ही भक्ति भाव के साथ मनाई गई। सुबह शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा व आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की पूजन की गई। वहीं दोपहर में पूज्य मुनिश्री निकलंक सागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन के परिवारजन कार्यक्रम में शामिल हुए जिनका जैन समाज के महामंत्री सुरेंद्र जैन सोनू ने तिलक,अंगपटिका से सम्मानित किया गया।
संकलन अभिषेक जैन लूहाडीया रामगंजमंडी

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